टैलेंट की कमी या फिर ?

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कभी भोजपुरी सिनेमा का दौर जोरो पे चलने लगता  है   तो कभी ऐसा लगता है मानो विलुप्त सा हो जायेगा ! अब भोजपुरी सिनेमा में  निरहुआ हिंदुस्तानी के बाद का जो दौर शुरू हुआ हैं  वो वाकई में भोजपुरी सिनेमा के लिए काबिले तारीफ है लेकिन संगीत की बात करे तो हर फिल्मो में आज कल एल्बम के गाने कुछ ज्यादा ही हद तक डाले जाने लगे हैं ! लेकिन आखिर ऐसा क्यों ?  बात की जाए भोजपुरी के संगीत निर्देशको की तो इनकी लिस्ट बहूत ही लंबी है जो  ” मधुकर आनंद , धनञ्जय मिश्र , विनय बिहारी , अविनाश झा घुँघरू , छोटे बाबा ,श्याम देहाती , राजेश रजनीश ,एस कुमार , जयंत आर्यन ,राजेश गुप्ता , गुनवंत सेन ,अमन श्लोक , लाल सिन्हा , राकेश त्रिवेदी , यहाँ तक की अब फिल्म निर्देशक ” राज कुमार आर पांडेय ” भी संगीत निर्देशक बन गए !  इनके अलावा भी कई ऐसे बहूत नाम है जिनके गाने हमेशा आते ही रहते हैं ! इतने सारे गुणवान लोगो के होते हुए भी आखिर ऐसी क्या वजह है जिसकी वजह से भोजपुरी फिल्मो को हिट करने के लिए एल्बम के गानो को फिल्म में डाला जा रहा हैं ! अब इसका जवाब भी तो वही लोग देंगे जो ऐसा कर सिनेमा को गर्त में डाल रहे है लेकिन अगर अब भी कुछ बदलाव नहीं हुआ तो वो दिन दूर नहीं जब फिल्मो और अलबमो में कोई अंतर नहीं रह जायेगा !